दांत और जीभ
एक बार एक महान दार्शनिक अपने शिष्यों को जीवन में लचीलेपन की महिमा को समझा रहे थे. उन्होंने दांत और जीभ का उदहारण देते हुए कहा कि दांत कभी भी जन्म से नहीं होते ये जन्म के 6 माह बाद आने शुरू होते है और बुढापे में साथ छोड़ देते हैं जबकि जीभ जन्म से ही हमारे मुँह में होती है और मरण तक सलामत रहती है .
इसका कारण दांतों का कठोर होना और जीभ का मुलायम,नम और लचीला होना है .
यही बात जीवन के हर क्षेत्र में लागू होती है जो व्यक्ति जीभ की तरह मुलायम,नम और लचीले होते हैं वो एक सफल जीवन जीते हैं जबकि कठोर व्यहवहार वाले लोग समय के साथ नष्ट हो जाते हैं .
धन्यवाद !

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