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दांत और जीभ

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  एक बार एक महान दार्शनिक अपने शिष्यों को जीवन में लचीलेपन की महिमा को समझा रहे थे. उन्होंने दांत और जीभ का उदहारण देते हुए कहा कि दांत कभी भी जन्म से नहीं होते ये जन्म के 6 माह बाद आने शुरू होते है और बुढापे में साथ छोड़ देते हैं जबकि जीभ जन्म से ही हमारे मुँह में होती है और मरण तक सलामत रहती है .  इसका कारण दांतों का कठोर होना और जीभ का मुलायम,नम और लचीला होना है . यही बात जीवन के हर क्षेत्र में लागू होती है जो व्यक्ति जीभ की तरह मुलायम,नम और लचीले होते हैं वो एक सफल जीवन जीते हैं जबकि कठोर व्यहवहार वाले लोग समय के साथ नष्ट हो जाते हैं . धन्यवाद ! 

सभ्यता की मात्रा

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  फ़्रांस के राजा हेनरी चतुर्थ घोड़े पर सवार होकर कहीं जा रहे थे. उनका अंगरक्षक भी उनके साथ था. तभी एक भिखारी मिला जिसने अपना हैट उतारकर उनका अभिवादन किया. इसके प्रत्युत्तर में राजा ने भी अपना हैट उतारकर अभिवादन किया. यह देखकर उनके अंगरक्षक ने पूछा, "महाराज! क्या यह उचित है कि एक राजा अपना हैट उतारकर किसी भिखारी का अभिवादन करे ?"  इस पर राजा ने कहा," अगर मैं अभिवादन न करता तो मेरी आत्मा मुझे धिक्कारती कि फ्रांस के राजा में एक भिखारी जितनी भी सभ्यता नहीं है."

हर पल यहाँ जी भर जीयो

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 नमस्कार  आपका स्वागत है : जिन्दगी एक सफ़र है सुहाना, यहाँ कब क्या हो किसने जाना  ! मित्रों! कभी कल की चिंता ना करें क्योंकि कल का क्या भरोसा ?उपरवाले ने जितने साँसें हमारे लिए निर्धारित की है उससे एक भी ज्यादा वो लेने नहीं देगा और न ही एक  सांस बाकी रहते वो आपको बुलाने वाला है I  तो फिर चिंता किस बात की ? हर पल यहाँ जी भर जिओ